Shubhanshu Shukla -ISS: प्रधानमंत्री मोदी और अंतरिक्ष यात्री!

Shubhanshu Shukla: भारत का पहला अंतरिक्ष यात्री जो पहुँचे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS)

भारत के अंतरिक्ष इतिहास में 15 जुलाई 2025 एक स्वर्णिम अध्याय बनकर दर्ज हो गया। लखनऊ के युवा और भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला ने 18 दिन का ऐतिहासिक मिशन पूरा कर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सफलतापूर्वक पृथ्वी पर वापसी की। वह भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री और पहले भारतीय जो ISS पर पहुँचे बने।

उनकी यह उपलब्धि न केवल भारत की वैज्ञानिक शक्ति का प्रतीक है, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ी छलांग भी है।

Shubhanshu Shukla: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात

Oplus_0

भारत वापसी के बाद शुभांशु शुक्ला ने सोमवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने उन्हें “भारत का गौरव” और “हमारे हीरो एस्ट्रोनॉट” कहकर सम्मानित किया।

मोदी ने कहा कि शुभांशु शुक्ला का यह मिशन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है और यह भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान (Human Spaceflight) की महत्वाकांक्षाओं को नई दिशा देगा।

Shubhanshu Shukla: संसद में विशेष चर्चा – “ISS पर भारत का पहला यात्री”

लोकसभा में पहली बार किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री की उपलब्धि पर विशेष चर्चा हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा:

यह केवल शुभांशु शुक्ला का सम्मान नहीं है, बल्कि भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं का उत्सव है।”

 

चर्चा का विषय था – “अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भारत का पहला यात्री – 2047 तक विकसित भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रम की भूमिका”।

हालांकि विपक्षी दलों ने सदन का बहिष्कार किया, लेकिन कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भाग लिया और इस मिशन को “भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान महत्वाकांक्षा का प्रतीक” बताया।

Shubhanshu Shukla:दिल्ली एयरपोर्ट पर ऐतिहासिक स्वागत

रविवार सुबह शुभांशु शुक्ला जब दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पहुँचे, तो उनका भव्य स्वागत हुआ।
स्वागत में मौजूद थे:

केंद्रीय विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

इसरो चेयरमैन वी. नारायणन

उनके परिवार के सदस्य और बैकअप अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे “भारत के लिए गर्व का क्षण” और “इसरो की गौरवगाथा” बताया।

Shubhanshu Shukla: 41 साल बाद भारतीय की अंतरिक्ष यात्रा

शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा ऐतिहासिक है क्योंकि:

1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष गए थे (सोवियत संघ के सोयुज T-11 से)।

41 साल बाद, भारत का कोई अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष गया।

पहली बार भारत का प्रतिनिधि ISS (International Space Station) पर पहुँचा।

Shubhanshu Shukla: ऐतिहासिक Axiom-4 मिशन

शुभांशु शुक्ला ने Axiom Space के निजी मिशन Ax-4 के तहत यह यात्रा की।

लॉन्च तिथि: 25 जून 2025

स्थान: केनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा (अमेरिका)

वाहन: SpaceX का Crew Dragon Spacecraft

साथी दल: तीन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्री

अवधि: 18 दिन (25 जून – 15 जुलाई)

वैज्ञानिक प्रयोग: 60 से अधिक

इन प्रयोगों में माइक्रोग्रैविटी रिसर्च, अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य अध्ययन, और नई तकनीकों का परीक्षण शामिल था।

ISS: अंतरिक्ष यात्रा से जुड़े महत्वपूर्ण समझौते

भारत की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे कई व्यावसायिक और सरकारी साझेदारियाँ रही:

1. Axiom Space–ISRO स्पेसफ्लाइट एग्रीमेंट

Axiom Space और ISRO के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ।

इसके तहत एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को Ax-4 मिशन में सीट दी गई।

2. भारत-अमेरिका द्विपक्षीय ढाँचा

NASA अब सीधे विदेशी अंतरिक्ष यात्रियों को स्पॉन्सर नहीं करता।

इसलिए भारत और अमेरिका ने एक विशेष सरकारी-से-सरकारी ढाँचा बनाया, जिससे यह मिशन संभव हुआ।

3. 70 मिलियन डॉलर में सीट खरीद

भारत ने लगभग 70 मिलियन डॉलर (करीब 580 करोड़ रुपये) में इस मिशन की सीट खरीदी।

इसमें ट्रेनिंग, मिशन इंटीग्रेशन, फ्लाइट और सपोर्ट शामिल था।

4. Axiom–Skyroot Aerospace साझेदारी

मिशन के दौरान Axiom ने भारतीय निजी स्पेस कंपनी Skyroot Aerospace के साथ MoU साइन किया।

भविष्य में भारतीय रॉकेट ISS और Axiom Station मिशन के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं।

5. NASA और SpaceX की भूमिका

NASA ने तकनीकी ढाँचा और ISS तक पहुँच दी।

SpaceX ने Crew Dragon के जरिए लॉन्च और रिटर्न की जिम्मेदारी निभाई।

Shubhanshu Shukla : ISS क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?

शुभांशु शुक्ला की यात्रा केवल एक वैज्ञानिक प्रयोग नहीं थी, बल्कि इसके दूरगामी प्रभाव हैं:

भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव मिला।

निजी और सरकारी कंपनियों की साझेदारी से भारत का स्पेस कॉमर्शियलाइजेशन बढ़ेगा।

यह अनुभव भारत के अपने गगनयान मिशन को और मजबूत करेगा।

भारत की डिप्लोमैटिक और टेक्नोलॉजिकल छवि वैश्विक मंच पर और सशक्त होगी।

Shubhanshu Shukla: परेड welcome लखनऊ में “ग्रैंड विक्ट्री परेड”

शुभांशु शुक्ला अगस्त में अपने गृहनगर लखनऊ पहुँचेंगे।
उनके स्कूल और कॉलेज ने “ग्रैंड विक्ट्री परेड” की घोषणा की है।
साथ ही, वह नेशनल स्पेस डे (22-23 अगस्त) के समारोह में भी हिस्सा लेंगे।

Shubhanshu Shukla: का ISS mission विकसित भारत 2047 और अंतरिक्ष की भूमिका

भारत का लक्ष्य है कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बने। इसमें अंतरिक्ष कार्यक्रम की बड़ी भूमिका होगी:

सैटेलाइट टेक्नोलॉजी से कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार।

स्पेस इंडस्ट्री में निजी क्षेत्र की भागीदारी से रोजगार और निवेश।

मानव अंतरिक्ष उड़ान से वैज्ञानिक और तकनीकी कौशल का विकास।

डीप स्पेस मिशन और स्पेस माइनिंग जैसी भविष्य की संभावनाएँ। शुभांशु शुक्ला का मिशन इसी यात्रा की मजबूत नींव है।

“शुभांशु शुक्ला का ISS मिशन भारत के लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक नया युग है।

उन्होंने 41 साल बाद फिर से भारत का झंडा अंतरिक्ष में लहराया।

उनकी सफलता ने न केवल भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए नए सपनों की उड़ान भी भरी है।

भारत अब सिर्फ स्पेस टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि मानव अंतरिक्ष अन्वेषण का निर्माता भी बन चुका है।

Leave a Reply