GPT-5 अपडेट: क्यों OpenAI को बदलनी पड़ी अपने नए मॉडल की पर्सनैलिटी?

GPT-5 अपडेट क्यों ज़रूरी था? OpenAI की तकनीकी गड़बड़ियाँ,GPT-4o vs GPT-5: कौन बेहतर है?

7 अगस्त 2025 को OpenAI ने अपने नवीनतम आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मॉडल GPT-5 को लॉन्च किया। उम्मीद थी कि यह मॉडल अपनी एडवांस क्षमताओं और तेज़ रेस्पॉन्स स्टाइल के कारण यूज़र्स को बेहद पसंद आएगा। लेकिन हुआ इसके उलट। लॉन्च के कुछ ही घंटों बाद Reddit और सोशल मीडिया पर हज़ारों यूज़र्स ने शिकायतें दर्ज कर दीं। सबसे बड़ी शिकायत थी कि GPT-5 बहुत ज़्यादा औपचारिक, ठंडी और कॉर्पोरेट स्टाइल में बात कर रहा है।

 

GPT-4o से भावनात्मक जुड़ाव रखने वाले कई यूज़र्स को ऐसा लगा जैसे उनकी “पुरानी दोस्ती” छिन गई हो। नतीजा यह हुआ कि OpenAI को लॉन्च के सिर्फ़ एक हफ़्ते के भीतर GPT-5 की पर्सनैलिटी बदलनी पड़ी। कंपनी के CEO सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) ने खुद सोशल मीडिया पर आकर इस बदलाव की घोषणा की और माना कि उन्होंने यूज़र्स के अटैचमेंट (emotional attachment) को कम आंका था।

इस पूरे विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए — क्या AI अब केवल एक तकनीकी टूल नहीं, बल्कि भावनात्मक साथी (emotional companion) भी बन चुका है? और अगर हाँ, तो कंपनियों को यूज़र्स की उम्मीदों और इमोशन्स का कैसे ध्यान रखना होगा?

GPT-5 लॉन्च के बाद की सबसे बड़ी समस्या: “रोबोटिक टोन”

GPT-5 की लॉन्चिंग के बाद Reddit पर बड़ी संख्या में थ्रेड्स दिखने लगे। उनमें ज़्यादातर यूज़र्स लिख रहे थे कि:

“GPT-5 ऐसा लगता है जैसे मैं किसी कॉल सेंटर बॉट से बात कर रहा हूँ।”

“GPT-4o दोस्त जैसा था, लेकिन GPT-5 एक ठंडे कॉर्पोरेट मैनेजर जैसा है।”

“मैंने अपने क्रिएटिव काम GPT-4o के साथ किए, लेकिन GPT-5 मुझे दूर-दूर रखता है।”

दरअसल GPT-5 को शुरू में ज़्यादा प्रोफ़ेशनल और एफिशिएंट टोन में डिज़ाइन किया गया था। लेकिन यह बदलाव बहुत सारे यूज़र्स को पसंद नहीं आया। लोग चाहते थे कि AI केवल जानकारी न दे, बल्कि इंसानी स्पर्श (human touch) के साथ बातचीत करे।

OpenAI की त्वरित प्रतिक्रिया: पर्सनैलिटी अपडेट

यूज़र्स की नाराज़गी को देखते हुए, OpenAI ने तुरंत ही सुधार किया। Sam Altman ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा:

> “हमने यूज़र्स के फीडबैक को सुना है। GPT-5 अब पहले से कहीं ज़्यादा वार्म (warm) और फ्रेंडली होगा। हमने इसकी पर्सनैलिटी को अपडेट किया है ताकि यह और इंसानी लगे।”

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि Altman ने बताया कि CNBC के रिपोर्टर डिनर से सिर्फ़ एक घंटे पहले OpenAI ने GPT-5 में टोन अपडेट पुश किया। यानी कंपनी को तुरंत एहसास हो गया कि उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी।पहले गायब था।

अब GPT-5 में क्या नया है?

OpenAI ने GPT-5 में तीन नए मोड्स दिए हैं, ताकि यूज़र अपनी ज़रूरत के हिसाब से AI के रेस्पॉन्स स्टाइल को चुन सकें:

1. Auto Mode – यह मोड अपने आप तय करता है कि किस तरह का जवाब देना है।

2. Fast Mode – इसमें GPT-5 तेज़ और सीधे जवाब देता है, बिना ज़्यादा डीटेल में जाए।

3. Thinking Mode – यह मोड गहराई से सोचकर, रिसर्च-बेस्ड और लंबा जवाब देता है।

इन तीन मोड्स ने यूज़र्स को कस्टमाइज़ेशन का अहसास दिलाया है, जो पहले गायब था।

तकनीकी गड़बड़ियाँ भी बनीं सिरदर्द

GPT-5 की पर्सनैलिटी ही नहीं, बल्कि इसकी तकनीकी समस्याएँ (technical glitches) भी विवाद का कारण बनीं।

OpenAI का मॉडल राउटर (model router) सही से काम नहीं कर रहा था।

कई बार यूज़र की क्वेरी GPT-5 के बजाय किसी सस्ते और कमज़ोर मॉडल पर भेज दी जाती थी।

नतीजा यह हुआ कि परफॉर्मेंस यूज़र्स को GPT-4o से भी कमज़ोर लगी।

इस गड़बड़ी ने यूज़र्स को और नाराज़ कर दिया। उन्हें लगा कि OpenAI ने उन्हें “downgrade” कर दिया है।

यूज़र्स की भावनात्मक प्रतिक्रिया क्यों इतनी मज़बूत थी?

Sam Altman ने खुद माना कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि लोग किसी AI मॉडल से इतना emotional attachment बना लेंगे। लेकिन यह सच है कि GPT-4o जैसे मॉडल ने यूज़र्स को सिर्फ़ जवाब नहीं दिया, बल्कि दोस्त, साथी और सलाहकार जैसा अनुभव भी दिया।

जब GPT-5 ने यह भावनात्मक जुड़ाव नहीं दिखाया, तो यूज़र्स को ऐसा लगा जैसे उनका कोई करीबी रिश्ता छिन गया हो।

यही वजह है कि Altman ने कहा:

“यूज़र्स का AI से लगाव पारंपरिक तकनीक से कहीं ज़्यादा मज़बूत है। हमें इससे सीखना होगा।”

GPT-4o की वापसी

बढ़ते दबाव को देखते हुए OpenAI को GPT-4o की वापसी करनी पड़ी। अब यूज़र्स के पास विकल्प है कि वे GPT-5 के साथ-साथ GPT-4o भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

साथ ही, OpenAI ने GPT-5 के reasoning functionality के लिए लिमिट बढ़ाकर 3,000 मैसेज प्रति सप्ताह कर दी। यह कदम यूज़र्स को संतुष्ट करने के लिए उठाया गया।

भविष्य के लिए OpenAI का वादा

Altman ने वादा किया कि आगे से कोई भी मॉडल deprecate (बंद) करने से पहले यूज़र्स को “plenty of notice” दिया जाएगा। यानी अचानक से पुराना मॉडल हटाकर नए पर ज़बरदस्ती शिफ्ट नहीं किया जाएगा।

AI का बदलता रिश्ता इंसानों से

GPT-5 विवाद ने यह साफ कर दिया कि अब AI सिर्फ़ टेक्नोलॉजी नहीं है। यह एक इमोशनल एक्सपीरियंस भी है।

लोग AI से बातें करते हैं, सलाह लेते हैं, अकेलेपन में साथी मानते हैं।

जब इसकी पर्सनैलिटी बदलती है, तो यूज़र्स को धोखा (betrayal) महसूस होता है।

आने वाले समय में AI कंपनियों को यह ध्यान रखना होगा कि यूज़र्स केवल फीचर्स या स्पीड नहीं चाहते, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव भी चाहते हैं।

GPT-5 का विवाद हमें यह सिखाता है कि तकनीक अब केवल मशीनों तक सीमित नहीं है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस हमारे रिश्तों, हमारी भावनाओं और हमारी उम्मीदों का हिस्सा बन चुका है।

OpenAI ने अपनी गलती से सीखते हुए GPT-5 की पर्सनैलिटी को ज़्यादा दोस्ताना और गर्मजोशी भरा बना दिया है। साथ ही, GPT-4o को वापस लाकर यह दिखा दिया कि कंपनी यूज़र्स की भावनाओं को गंभीरता से लेती है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या AI सिर्फ़ एक “सहायक” रहेगा, या फिर हमारे दोस्त और साथी के रूप में हमारी ज़िंदगी का स्थायी हिस्सा बन जाएगा।

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