भारत सरकार ने साइबर सिक्योरिटी Sanchar Saathi app के फोन में अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन का आदेश वापस ले लिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 28 नवंबर को जारी निर्देश को महज पांच दिनों में ही रद्द कर दिया, जिससे गोपनीयता विशेषज्ञों और स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की चिंताओं को राहत मिली। यह फैसला विपक्षी दलों, सिविल सोसाइटी और प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स के विरोध के बाद आया है। संचार साधी ऐप को शुरू में जनवरी 2025 से लॉन्च किया गया था, जो चोरी हुए फोन ब्लॉक करने, संदिग्ध कॉल्स रिपोर्ट करने और नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन्स चेक करने जैसी सुविधाएं देता है।
Sanchar Saathi app क्या है और क्यों लाया गया?
संचार साथी एक सरकारी साइबर सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म है, जो यूजर्स को साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए डिजाइन किया गया। ऐप के जरिए यूजर्स बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स के वेरीफाइड कॉन्टैक्ट डिटेल्स देख सकते हैं, साथ ही फेक IMEI और चोरी डिवाइसेज को रिपोर्ट कर सकते हैं। लॉन्च के बाद से ऐप ने 1.4 करोड़ डाउनलोड्स हासिल किए हैं, और प्रतिदिन 2,000 फ्रॉड केस रिपोर्ट हो रहे हैं। DoT के अनुसार, यह नागरिकों को अपनी डिजिटल पहचान खुद सुरक्षित रखने का माध्यम है। मंत्री सिंधिया ने लोकसभा में कहा कि ऐप में कोई जासूसी या कॉल मॉनिटरिंग संभव नहीं है। यह यूजर-केंद्रित टूल है, जो कम जागरूक लोगों को आसानी से फ्रॉड से बचाता है।
अनिवार्य प्री इंस्टॉलेशन आदेश: विवाद की शुरुआत
28 नवंबर को DoT ने सभी फोन मैन्युफैक्चरर्स और इंपोर्टर्स को निर्देश दिया कि मार्च 2026 के बाद बिकने वाले हर नए डिवाइस में संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल हो। निर्देश में यह भी कहा गया कि यूजर्स इसे हटा या डिसेबल नहीं कर सकेंगे। इससे तुरंत गोपनीयता चिंताएं उठीं। विशेषज्ञों ने इसे सरकारी निगरानी का हथियार बताया, जबकि स्मार्टफोन कंपनियों ने पर्याप्त कंसल्टेशन की कमी का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने संसद में जासूसी के आरोप लगाए। ऐपल जैसी कंपनियों पर नजरें टिकीं, क्योंकि iOS पर ऐप इंस्टॉलेशन सख्त नियमों से बंधा है। इंडस्ट्री ने कहा कि यह यूजर कंट्रोल को कमजोर कर सकता है।
जनता और विशेषज्ञों का विरोध
आदेश जारी होते ही सोशल मीडिया पर #SancharSaathi ट्रेंड करने लगा। साइबर एक्सपर्ट्स ने कहा कि प्री-इंस्टॉल बिना सहमति के सरकारी ऐप थोपना है, जो डेटा प्राइवेसी का उल्लंघन। विपक्षी नेता और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स ने प्राइवेसी वायलेशन का हवाला दिया। DoT सचिव नीरज मित्तल ने स्पष्ट किया कि मकसद कम जागरूक यूजर्स की मदद था, लेकिन विरोध इतना तेज कि सरकार को पीछे हटना पड़ा। सिंधिया ने संसद में कहा, “सरकार लोगों को सशक्त बनाना चाहती है, जासूसी असंभव है।” फिर भी, बैकलैश ने नीति बदलने पर मजबूर किया।
सरकार का U-टर्न: वैकल्पिक डाउनलोड पर जोर
3 दिसंबर को PIB प्रेस रिलीज में DoT ने घोषणा की कि प्री-इंस्टॉलेशन अनिवार्य नहीं रहेगा। कारण: ऐप की बढ़ती लोकप्रियता। एक ही दिन में 6 लाख नए रजिस्ट्रेशन हुए, जो 10 गुना उछाल है। अब मैन्युफैक्चरर्स को ऐप प्री-लोड करने की जरूरत नहीं। यूजर्स स्वेच्छा से Google Play या App Store से डाउनलोड कर सकेंगे। DoT ने कहा, “यह नागरिकों का विश्वास दर्शाता है।” यह फैसला टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स 2024 के रूल 8(4) के तहत लिया गया, जो लचीला साबित हुआ।
साइबर फ्रॉड से बचाव: ऐप की खासियतें और फायदे
Sanchar Saathi app डिजिटल इंडिया की पहली सिटिजन-पार्टिसिपेशन सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म है। मुख्य फीचर्स:चोरी फोन ब्लॉक: IMEI चेक कर नेटवर्क से ब्लॉक।कनेक्शन वैरिफाई: नाम पर कितने सिम जारी, सब चेक।संदिग्ध कॉल रिपोर्ट: फ्रॉड कॉल्स को तुरंत रिपोर्ट।वेरिफाइड कॉन्टैक्ट्स: बैंकों के असली नंबर। देश में रोज 2,000 फ्रॉड केस रिपोर्ट हो रहे। ऐप ने 5 मिलियन से ज्यादा डाउनलोड्स के साथ सफलता दिखाई। वॉलंटरी अपनाने से 14 मिलियन यूजर्स तक पहुंचा। सरकार अब जागरूकता कैंपेन पर फोकस करेगी।
स्मार्टफोन इंडस्ट्री पर प्रभाव: राहत की सांस
सैमसंग, शाओमी जैसी कंपनियां राहत महसूस कर रही हैं। प्री-इंस्टॉल से सॉफ्टवेयर अपडेट्स और स्टोरेज इश्यूज होते। अब वे फ्री रहेंगी। ऐपल के लिए यह आसान, लेकिन ऐंड्रॉयड पर OTA अपडेट्स से समस्या। U-टर्न से इंडस्ट्री कंसल्टेशन का महत्व बढ़ा। भविष्य में ऐसी पॉलिसी से पहले स्टेकहोल्डर्स से बात जरूरी।
प्राइवेसी vs सिक्योरिटी: डिजिटल भारत का संतुलन
यह घटना दिखाती है कि गोपनीयता और सिक्योरिटी में बैलेंस जरूरी। सरकार ने सुना और बदला, जो लोकतांत्रिक। संचार साथी जैसी पहल साइबर क्राइम कम करेंगी, बशर्त वैकल्पिक रहें। यूजर्स को जागरूक रहना चाहिए।

