No Cost EMI के माध्यम से offer दे कर Amazon- Flipkart इत्यादि Online प्लेटफॉर्म फेस्टिवल सीजन में मोबाइल फोन्स, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट, और दूसरे होम अप्लायंसेज इत्यादि पर हजारों करोड़ रुपए की बिक्री करते हैं। इसमें सबसे ज्यादा प्रसंद किए जाने वाला ऑफर नो कॉस्ट EMI लोगों को आकर्षित करता है। लेकिन क्या आप जानते है EMI चुनने पर छूट गायब हो जाती है और प्रोसेसिंग+GST मिलाकर अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है। आम जनता को लगता है कि कम EMI किस्त देकर महंगे सामान को खरीद लिया है। लेकिन किस्तों के इस हेराफेरी में प्रोडक्ट के एक्चुअल कॉस्ट से कहीं ज्यादा कीमत चुकानी पड़ जाती है। आइए जानते है पूरा सच।
No Cost EMI + Normal फेस्टिवल सेल 2024 के ऑनलाइन खरीददारी के आंकड़े
भारत में हर साल त्योहारी सीज़न के दौरान ऑनलाइन शॉपिंग का बूम देखने को मिलता है। फेस्टिव सेल 2024 में सिर्फ एक हफ्ते में 55,000 करोड़ रुपये की बिक्री हुई, जो 2023 की तुलना में लगभग 25% अधिक है। इन सेल्स में सबसे बड़ा योगदान रहा मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेस का, जो कुल बिक्री का लगभग आधा हिस्सा बनाते हैं। इसी दौरान सबसे ज्यादा लोकप्रिय ऑफर रहा – नो-कॉस्ट EMI। लेकिन सवाल यह है कि क्या नो-कॉस्ट EMI वाकई “फ्री” है या इसके पीछे छुपा हुआ अतिरिक्त खर्च है?
No Cost EMI का असली खेल क्या है?
अक्सर कंपनियां और ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म “नो-कॉस्ट EMI” को ऐसे पेश करते हैं जैसे ग्राहक को बिना ब्याज के आसान किस्तों का लाभ मिल रहा हो। लेकिन असलियत थोड़ी अलग है। आइए समझते है एक उदाहरण के तौर पर ,मान लीजिए आप एक मोबाइल फोन खरीदते हैं जिसकी कीमत ₹60,000 है। अब देखते हैं नो-कॉस्ट EMI लेने पर आपका असली खर्च कितना होगा:
उदाहरण

यानी नो-कॉस्ट EMI लेने पर आपको ₹7,120 अधिक चुकाने पड़ते है।
No Cost EMI क्यों महंगी पड़ती है?
- डिस्काउंट का नुकसान – अधिकतर कंपनियां जो छूट upfront पेमेंट पर देती हैं, EMI चुनने पर वह छूट नहीं मिलती।
- प्रोसेसिंग फीस – बैंकों या NBFCs द्वारा एक निश्चित चार्ज लगाया जाता है।
- फीस पर GST – प्रोसेसिंग फीस पर भी 12-18% GST अलग से देना पड़ता है।
इस तरह “नो-कॉस्ट” कहकर असल में हिडन कॉस्ट ग्राहक से वसूला जाता है।
EMI लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और क्यों?
- डिस्काउंट चेक करें – EMI चुनने से पहले देखें कि upfront पेमेंट करने पर कितना डिस्काउंट मिलता।
- प्रोसेसिंग फीस और GST जोड़ें – यह छोटा अमाउंट लग सकता है, लेकिन जोड़ने पर कुल खर्च काफी बढ़ जाता है।
- एक से ज्यादा EMI न चुनें – बहुत सारे प्रोडक्ट्स पर EMI लेने से हर महीने की देनदारी बढ़ती है और क्रेडिट स्कोर पर भी असर पड़ता है।
- कैशबैक और बैंक ऑफर देखें – अगर EMI पर मिलने वाला कैशबैक अतिरिक्त लागत से ज्यादा है तो यह एक बेहतर डील हो सकती है।
ग्राहकों के लिए सीधी सलाह
✓अगर आपके पास एकमुश्त भुगतान की क्षमता है तो हमेशा डायरेक्ट पेमेंट करना बेहतर है।
✓नो-कॉस्ट EMI केवल तभी लें जब
✓कैशबैक/डिस्काउंट EMI चार्ज से ज्यादा हो, या
✓आपको अस्थायी कैश फ्लो मैनेज करना हो।
✓शॉपिंग करते समय हमेशा “फाइनल पेआउट” पर नज़र रखें, सिर्फ EMI की छोटी किस्तों पर नहीं।
नोट करने की बात: त्योहारी सीज़न में मिलने वाले डील्स और ऑफर्स देखने में बेहद आकर्षक लगते हैं। लेकिन नो-कॉस्ट EMI हर बार फायदेमंद नहीं होती। यह एक स्मार्ट मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है, जहां कंपनियां डिस्काउंट छुपाकर, प्रोसेसिंग फीस और टैक्स जोड़कर ग्राहक से ज्यादा वसूल लेती हैं। EMI का फायदा लेना है तो पहले मैथमेटिकल तुलना करें और तभी फैसला लें। याद रखें ,ऑफर भले ही “नो-कॉस्ट” कहा जाए, लेकिन कई बार इसकी असली कीमत आपके जेब से ज्यादा निकल जाती है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य वित्तीय जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्य से साझा की गई है। इसमें बताए गए उदाहरण अनुमानित गणनाओं और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ऑफर्स पर आधारित हैं। वास्तविक कीमतें, बैंक चार्जेस, GST दरें और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के डिस्काउंट समय और स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। किसी भी खरीदारी या वित्तीय निर्णय से पहले कृपया संबंधित बैंक, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या सेवा प्रदाता से आधिकारिक जानकारी अवश्य सत्यापित करें।
