New GST2.0: महंगाई की मार झेल रहे लोगों को बड़ी राहत अब सस्ते होगी रोजमर्रा की वस्तुएं, GST 5%और 18%

New GST2.0 : GST Council ने 5% और 18% दो दरों में टैक्स स्लैब सरल किया। मोदी बोले- आम नागरिकों, किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए दिवाली गिफ्ट। जीएसटी काउंसिल की ऐतिहासिक टैक्स सुधार मंजूरी: मोदी बोले – ‘नागरिकों और छोटे कारोबारियों के लिए दिवाली गिफ्ट’

भारत में टैक्स प्रणाली को सरल और जनहितैषी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को जीएसटी काउंसिल द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण फैसले का स्वागत करते हुए इसे “नेक्स्ट-जेनरेशन सुधार” GST 2.0 बताया। इन सुधारों से आम नागरिकों, किसानों और छोटे कारोबारियों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

सरकार, केवल 2 GST tax ढांचा 22 सितंबर से लागू होगा

56वीं जीएसटी काउंसिल बैठक, जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की, में मौजूदा पांच टैक्स स्लैब को घटाकर मुख्यतः दो दरों – 5% और 18% में बदलने का निर्णय लिया गया। 12% और 28% वाले स्लैब पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएंगे। 99% वस्तुएं जो अभी 12% पर टैक्स दे रही थीं, वे अब 5% पर आएंगी। करीब 90% वस्तुएं जो 28% श्रेणी में थीं, वे अब 18% पर शिफ्ट होंगी। लग्ज़री और ‘सिन गुड्स’ (तंबाकू, महंगी गाड़ियां, शुगर ड्रिंक्स आदि) के लिए अलग से 40% टैक्स स्लैब बनाया गया है। सरकार ने घोषणा की है कि यह नई व्यवस्था 22 सितंबर से लागू होगी, जो कि नवरात्रि की शुरुआत का दिन है। इस तरह सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले उपभोक्ताओं को राहत देने का कदम उठाया है।

लगभग 175 वस्तुएं होंगी सस्ती, जरूरी सामान पर GST 0%

वित्त मंत्रालय के अनुसार 175 से अधिक उपभोग की वस्तुएं नई दरों से सस्ती होंगी। अनिवार्य खाद्य पदार्थ जैसे UHT दूध, पनीर और भारतीय ब्रेड को पूरी तरह जीएसटी मुक्त कर दिया गया है। घरेलू उपयोग की चीजें जैसे हेयर ऑयल, शैंपू और टूथब्रश पर टैक्स दर 18% से घटाकर 5% कर दी गई है। दैनिक जरूरत की अन्य वस्तुओं पर भी कर का बोझ घटेगा। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू खपत में बड़ी बढ़ोतरी होगी और उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम होगा।

GST 2.0 से राज्यों को होगा फायदा, राजस्व में होगा मुनाफा

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, नई जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद भी राज्य सरकारों को नुकसान नहीं होगा। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में राज्यों को 14.1 लाख करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। हालांकि, राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने स्वीकार किया कि बदलावों से लगभग 48,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्रभाव पड़ेगा। लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि बढ़ी हुई खपत और टैक्स अनुपालन के चलते यह घाटा समय के साथ भर जाएगा।

त्योहारी सीजन में खपत बढ़ेगा, डिमांड और सप्लाई चैन को मिलेगा बल GDP में होगा ग्रंथ!

सरकार ने इन सुधारों को ऐसे समय लागू करने का फैसला लिया है जब देश में नवरात्रि से दीपावली तक का सबसे बड़ा त्योहारी सीजन शुरू होता है। खुदरा बाजार में इस दौरान करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कम टैक्स दरों से वस्तुएं सस्ती होंगी और लोग ज्यादा खरीदारी करेंगे। इससे न केवल घरेलू मांग बढ़ेगी बल्कि आर्थिक विकास दर को भी बल मिलेगा।

कई अर्थशास्त्रियों ने इस निर्णय को “ऐतिहासिक” बताया है। उनका मानना है कि टैक्स स्ट्रक्चर के सरल होने से टैक्स अनुपालन (Compliance) बढ़ेगा। नकली बिलिंग और टैक्स चोरी में कमी आएगी। देश में वन नेशन, वन टैक्स की अवधारणा और मजबूत होगी। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सरकार को राज्यों के लिए क्षतिपूर्ति तंत्र (Compensation Mechanism) को मजबूत बनाए रखना होगा ताकि राजस्व हानि का बोझ राज्यों पर न पड़े।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, सरकारी बयानों और उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। टैक्स दरों और वस्तुओं की अंतिम सूची जीएसटी काउंसिल तथा भारत सरकार की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार अलग हो सकती है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी वित्तीय निर्णय या खरीदारी से पहले सरकारी वेबसाइट अथवा अधिकृत स्रोत से नवीनतम विवरण अवश्य जाँच लें।