Gold-Silver Rate today India, भारत में आज सोना ₹119500/10 ग्राम और चांदी ₹1.5 लाख/ Kg पहुंच गया। जानते है कारण और निवेश की रणनीतियां।
भारत में सोने-चांदी की कीमतों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
भारत में सोने और चांदी की कीमतों ने सोमवार को नए इतिहास रच दिए। घरेलू बाजार में दोनों धातुओं ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया है। निवेशकों के बीच अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों और त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग के चलते सोना-चांदी इस समय “सुरक्षित निवेश” (Safe Haven) की सबसे पसंदीदा संपत्ति बन गई है।
चांदी पहली बार ₹1.5 लाख प्रति किलोग्राम के पार
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी ने सोमवार को इतिहास रचते हुए पहली बार ₹1.5 लाख प्रति किलोग्राम का स्तर पार कर लिया। पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में इसमें ₹7,000 की जोरदार छलांग देखने को मिली। वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी के लिए चांदी वायदा ₹2,290 यानी 1.61% बढ़कर ₹1,44,179 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। मार्च 2026 का चांदी वायदा भी ₹1,45,817 प्रति किलोग्राम तक चढ़ गया, जो पिछले बंद भाव से 1.79% ज्यादा है।
सोने ने भी रचा नया रिकॉर्ड
सोने ने भी निवेशकों को निराश नहीं किया। घरेलू बाजार में सोने की कीमत ₹1,19,500 प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह पिछले सत्र की तुलना में ₹1,500 की वृद्धि है। MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना ₹1,16,050 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जिसमें 1% की तेजी दर्ज की गई। वहीं, अक्टूबर का सोना वायदा ₹1,204 उछलकर ₹1,14,992 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड हुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का समर्थन
घरेलू बाजार में हुई तेजी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले मजबूत संकेतों का नतीजा है। वैश्विक स्तर पर सोने के वायदा भाव 1% उछलकर $3,837.72 प्रति औंस तक पहुंच गए। अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड $3,824.61 प्रति औंस के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंचा।वहीं, चांदी 2% से ज्यादा चढ़कर $47.18 प्रति औंस पर कारोबार कर रही है।
डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से मिला सहारा
डॉलर इंडेक्स में 0.18% की गिरावट दर्ज की गई और यह 97.97 पर आ गया। डॉलर कमजोर होने से डॉलर में मूल्यांकित सोने-चांदी की मांग बढ़ी है। यही कारण है कि विदेशी निवेशक भी इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति का असर
बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी दर कटौती की संभावना ने भी सोने-चांदी को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में बड़ा योगदान दिया है। अक्टूबर में 90% संभावना है कि फेड दरों में कटौती करेगा। दिसंबर में दोबारा कटौती की 65% संभावना जताई जा रही है। रिलायंस सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी का कहना है कि कमजोर डॉलर और दरों में कटौती की उम्मीदों ने सोने को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचाया है।
भू-राजनीतिक तनाव और नई टैरिफ नीति
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 1 अक्टूबर से आयातित वस्तुओं पर नए टैरिफ लगाने के ऐलान ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सोना-चांदी खरीदने के लिए प्रेरित किया है।
केंद्रीय बैंकों और ETF निवेश से बढ़ी मांग
विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोना खरीदना और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में बढ़ते निवेश ने भी कीमतों को सहारा दिया है। भारतीय निवेशकों के लिए अब तक का ‘गोल्डन ईयर’ 2025 भारतीय निवेशकों के लिए अब तक का सबसे शानदार साल साबित हो रहा है। सोने ने इस साल अब तक लगभग 45% का रिटर्न दिया है। चांदी ने निवेशकों को 62% का जबरदस्त रिटर्न दिया है।शेयर बाजार की तुलना में सोना-चांदी इस साल कहीं ज्यादा लाभकारी साबित हुए हैं। यही कारण है कि त्योहारी सीजन में आम लोग भी भारी निवेश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय – क्या आगे भी जारी रहेगी तेजी?
एंजेल वन के रिसर्च हेड पृथमेश मल्ल्या का कहना है कि पिछले हफ्ते से लगातार सोना नए उच्च स्तर पर पहुंच रहा है। आने वाले दिनों में अगर अमेरिकी फेड दरें कम करता है और डॉलर कमजोर बना रहता है तो सोने-चांदी में और तेजी देखी जा सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ निवेशकों को यह भी सलाह देते हैं कि इस समय निवेश सोच-समझकर करें क्योंकि कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है।
निष्कर्ष
त्योहारी मांग, वैश्विक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर, दर कटौती की उम्मीदें, और भू-राजनीतिक तनाव – इन सभी ने मिलकर सोने-चांदी की कीमतों को ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। भारत में निवेशकों के लिए यह समय सोना-चांदी में रिकॉर्ड कमाई का साबित हो रहा है। लेकिन बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेश करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
