Gold Silver Price Today : सोना चांदी की कीमतों में भारी गिरावट नवंबर की शुरूआत में बाजार में हड़कंप जानिए क्या है गिरावट के कारण

Gold Silver Price Today, भारत में 4 नवंबर 2025 को सोने और चांदी के दामों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। जहां एक तरफ चांदी में ₹3,150 प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई, वहीं सोना भी लगभग ₹487 प्रति 10 ग्राम तक लुढ़क गया। लगातार दूसरे दिन बहुमूल्य धातुओं में आई इस गिरावट ने निवेशकों और ग्राहकों दोनों को चौंका दिया है, खासकर उस समय जब देश में शादियों का सीजन शुरू होने वाला है, जो सामान्यतः सोने-चांदी की मांग को बढ़ाता है।

MCX पर Gold और Silver Price की स्थिति

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाले सोने के फ्यूचर्स ₹487 गिरकर ₹1,20,928 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। वहीं, चांदी के दाम ₹1,800 घटकर ₹1,48,343 प्रति किलोग्राम तक आ गए। भारतीय बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने के दाम ₹358 घटकर ₹1,20,419 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹3,150 लुढ़ककर ₹1,46,150 प्रति किलो हो गई।दिल्ली के स्थानीय बाजारों में भी यही रुझान देखने को मिला, जहां 24 कैरेट सोना ₹1,200 गिरकर ₹1,23,500 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,500 घटकर ₹1,51,500 प्रति किलो हो गई। अगर हालिया उच्च स्तरों की तुलना करें तो, अक्टूबर के उच्चतम स्तर से अब तक सोना ₹10,857 और चांदी ₹23,300 तक नीचे आ चुकी है।

Gold Silver Price में गिरावट के प्रमुख कारण

इस तेज गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। सबसे प्रमुख कारण है अमेरिकी फेडरल रिजर्व (U.S. Federal Reserve) की ब्याज दर नीति से जुड़ी बदलती उम्मीदें।

फेड चेयरमैन पॉवेल के ‘हॉकिश’ बयान का असर

पिछले सप्ताह फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के कड़े रुख वाले बयानों के बाद निवेशकों को दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम लगने लगी। पहले जहां दरों में कटौती की संभावना 90% से अधिक थी, वहीं अब यह घटकर करीब 65% रह गई है। उच्च ब्याज दरों का मतलब है कि निवेशक ब्याज न देने वाली परिसंपत्तियों, जैसे सोना और चांदी, से दूरी बनाते हैं, क्योंकि उन्हें अन्य निवेशों पर बेहतर रिटर्न मिल सकता है।

डॉलर की मजबूती का दबाव

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण भी सोने-चांदी पर दबाव बना है। डॉलर इंडेक्स तीन महीने के उच्च स्तर 99.95 के पास पहुंच गया है, जिससे अन्य मुद्राओं में निवेश करने वाले खरीदारों के लिए सोना-चांदी महंगे हो गए हैं। मजबूत डॉलर का सीधा असर सोने की वैश्विक मांग पर पड़ता है, क्योंकि सोना डॉलर में ही ट्रेड किया जाता है।

चीन की नई टैक्स नीति

गिरावट का एक और बड़ा कारण चीन की नीति में बदलाव है। दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देश चीन ने 1 नवंबर से कुछ स्वर्ण खुदरा विक्रेताओं के लिए टैक्स रिबेट घटाकर 13% से 6% कर दिया है।
इस कदम से गोल्ड ट्रेडर्स और निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी है, क्योंकि इससे स्थानीय मांग में कमी आने की आशंका जताई जा रही है।

अमेरिका-चीन व्यापार तनाव में कमी

जहां पहले अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी थी, वहीं अब दोनों देशों के बीच रिश्तों में थोड़ी नरमी आई है। इससे भी कीमती धातुओं की मांग घटने लगी है।

Gold Silver Price Down पर विशेषज्ञों की राय

मोतिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विश्लेषक मोदी के अनुसार

“डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होने से सोना $4,000 प्रति औंस के आसपास टिका रहा। वहीं, अमेरिका-चीन संबंधों में नरमी और चीन की टैक्स नीति में बदलाव ने भी कीमती धातुओं की मांग को कमजोर किया है।”

Gold Silver Price Down का निवेशकों के लिए क्या मतलब है ?

हालांकि हालिया दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है, लेकिन निवेशकों के लिए यह लॉन्ग-टर्म खरीदारी का मौका भी हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में शादी का सीजन, त्योहारी मांग, और भूराजनीतिक जोखिम सोने को फिर से मजबूती दे सकते हैं। इसके अलावा, औद्योगिक उपयोग, विशेषकर सोलर पैनल निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग, में चांदी की बढ़ती मांग लंबे समय में कीमतों को सपोर्ट करती रहेगी।

Gold Silver का सालभर का प्रदर्शन अब भी मजबूत

भले ही अभी दामों में गिरावट आई हो, लेकिन वर्ष 2025 के दौरान सोना अब तक 50% से अधिक चढ़ चुका है। वहीं, चांदी भी साल-दर-साल मजबूत रिटर्न दे रही है। यह स्पष्ट संकेत है कि दीर्घकाल में निवेशकों का भरोसा अभी भी इन धातुओं पर बना हुआ है।

Gold Silver Price में आगे क्या दिशा होगा?

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दिसंबर में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती नहीं करता है, तो सोने-चांदी में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
हालांकि, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, और राजनीतिक तनाव जैसे कारक बुलियन को फिर से मजबूती दे सकते हैं।

निष्कर्ष

4 नवंबर 2025 को सोने और चांदी की कीमतों में आई यह भारी गिरावट अल्पकालिक सुधार मानी जा सकती है। जहां निवेशक इसे नुकसान के रूप में देख रहे हैं, वहीं कई विशेषज्ञ इसे एक सुनहरा निवेश अवसर बता रहे हैं। आने वाले हफ्तों में अगर डॉलर कमजोर होता है या फेडरल रिजर्व नीति में नरमी दिखाता है, तो सोना और चांदी दोनों फिर से तेज़ी की राह पकड़ सकते हैं।