डॉ. प्रताप सी. रेड्डी –Dr. Prathap C Reddy बड़े दिल वाले महान चिकित्सक और भारत में स्वास्थ्य क्रांति के जनक :
भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की जब भी बात होती है, तो एक नाम सबसे पहले सामने आता है – डॉ. प्रताप चंद्र रेड्डी (Dr. Prathap C Redd)। 1980 के दशक में जब देश की चिकित्सा व्यवस्था लगभग पूरी तरह से सरकारी अस्पतालों पर निर्भर थी, तब इस दूरदर्शी कार्डियोलॉजिस्ट ने एक ऐसा सपना देखा जिसने भारत के हेल्थकेयर सेक्टर की दिशा ही बदल दी। उन्होंने न केवल आधुनिक चिकित्सा को भारत लाया बल्कि लाखों लोगों को जीवन देने का काम भी किया।
Dr. Prathap C Reddy का शुरुआती जीवन और शिक्षा :
डॉ. प्रताप रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के एक साधारण परिवार में हुआ। बचपन से ही वे पढ़ाई में होशियार थे और डॉक्टर बनने का सपना देखते थे। उन्होंने स्टेनली मेडिकल कॉलेज, चेन्नई से MBBS की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए अमेरिका गए, जहाँ उन्होंने कार्डियोलॉजी में विशेषज्ञता हासिल की और सफल प्रैक्टिस शुरू की।
Dr. Prathap C Reddy के पिता जी का पत्र और भारत वापसी:
अमेरिका में शानदार करियर बनाने के बाद भी उनका मन पूरी तरह से संतुष्ट नहीं था। तभी उनके पिता का एक पत्र उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। पत्र में केवल यही लिखा था –
“देश को तुम्हारी ज़रूरत है, वापस आओ।“
इस पत्र ने डॉ. रेड्डी को गहराई से झकझोर दिया और 1970 के दशक की शुरुआत में वे भारत लौट आए। चेन्नई में उन्होंने प्रैक्टिस शुरू की और जल्दी ही लोकप्रिय चिकित्सक बन गए।
भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई:
भारत लौटने के बाद उन्हें एक दर्दनाक सच्चाई का सामना करना पड़ा। उस समय देश में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और उन्नत तकनीक की भारी कमी थी। जटिल सर्जरी या इलाज के लिए मरीजों को अमेरिका या यूरोप भेजना पड़ता था।
कई गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अपने प्रियजनों को विदेश नहीं भेज पाते और इलाज न मिलने से उनकी मौत हो जाती। 1979 की एक घटना ने डॉ. रेड्डी को अंदर तक हिला दिया, जब उनके एक मरीज को विदेश न जा पाने के कारण जान गंवानी पड़ी। उसी दिन उन्होंने ठान लिया कि भारत में ही विश्वस्तरीय अस्पताल की नींव रखेंगे।
Dr. Prathap C Reddy द्वारा अपोलो हॉस्पिटल्स की स्थापना:
1983 में चेन्नई की ग्रीम्स रोड पर अपोलो हॉस्पिटल्स की शुरुआत हुई। यह भारत का पहला प्रोफेशनली मैनेज्ड निजी मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल था।
शुरुआती निवेश : 30 करोड़ रुपये
CT स्कैन मशीन आयात और इंस्टॉलेशन पर : 5 करोड़ रुपये
फंडिंग : पाँच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लोन
150 बिस्तरों वाला यह अस्पताल भारतीय स्वास्थ्य जगत में एक नई सुबह की तरह था। यहाँ मरीजों को वही तकनीक, वही आधुनिक उपकरण और वही गुणवत्ता वाली सेवाएँ मिलने लगीं, जो पहले केवल विदेशों में उपलब्ध थीं।
India में स्वास्थ्य क्रांति की शुरुआत:
अपोलो हॉस्पिटल्स की सफलता ने पूरे देश में निजी स्वास्थ्य सेवा का रास्ता खोल दिया। आज अपोलो ग्रुप के पास भारत और विदेशों में 70 से अधिक अस्पताल, 4000 से अधिक फार्मेसियाँ और लाखों मरीजों का भरोसा है।
डॉ. रेड्डी ने हमेशा “आयरन ट्रायंगल ऑफ हेल्थकेयर” यानी क्वालिटी, अफोर्डेबिलिटी और एक्सेसिबिलिटी पर ज़ोर दिया। उनकी सोच थी –
“हर भारतीय को बेहतर इलाज, सस्ती कीमत और आसानी से उपलब्ध स्वास्थ्य सेवा मिलनी चाहिए।”
सरकार और समाज से सम्मान
डॉ. प्रताप सी. रेड्डी के योगदान को देखते हुए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले।
पद्म भूषण (1991)
पद्म विभूषण (2010)
2009 में भारतीय डाक विभाग ने अपोलो हॉस्पिटल्स पर डाक टिकट जारी किया
लायंस ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड (2018) – यह सम्मान पाने वाले वे भारत के पाँचवें व्यक्ति बने
EY एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर (2021)
अनेक लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड्स।
अपोलो का सामाजिक दृष्टिकोण
अपोलो सिर्फ एक अस्पताल समूह नहीं बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है। यह संस्था स्वास्थ्य क्षेत्र में कई पहलें चला रही है –
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा
टेलीमेडिसिन प्रोजेक्ट
अंगदान अभियान
कैंसर और हृदय रोग जागरूकता कार्यक्रम
इन पहलों ने लाखों लोगों को जीवनदान दिया है।
डॉ. रेड्डी – बड़े दिल वाले इंसान
डॉ. प्रभात रेड्डी सिर्फ एक सफल डॉक्टर और उद्यमी नहीं हैं, बल्कि बड़े दिल वाले इंसान भी हैं। उन्होंने हमेशा मरीज को व्यवसाय से ऊपर रखा। उनका मानना है कि –
“अस्पताल एक व्यापार नहीं, बल्कि सेवा का मंदिर है।”
आज 90 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी वे सक्रिय हैं और अपोलो ग्रुप को आगे बढ़ा रहे हैं।
डॉ. प्रताप सी. रेड्डी की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता की गाथा नहीं, बल्कि भारत की स्वास्थ्य क्रांति का इतिहास है। उन्होंने दिखा दिया कि संकल्प और सेवा की भावना से कोई भी असंभव कार्य संभव हो सकता है।
आज जब भारत चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) का हब बन चुका है, तो इसका बड़ा श्रेय डॉ. रेड्डी और अपोलो हॉस्पिटल्स को जाता है। सच में, वे “मैन विद ए बिग हार्ट” हैं, जिन्होंने लाखों दिलों को धड़कन दी है।