AQI Delhi-NCR दिल्ली का दम घुट रहा है: दसवें दिन भी AQI बहुत ख़राब, हालात गंभीर कड़े प्रतिबंध लागू, अस्पतालों में बढ़ी भीड़

AQI Delhi-NCR राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली रविवार को फिर जहरीली हवा की गिरफ्त में रही। लगातार दसवें दिन भी हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब (Very Poor)’ श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि शहर के कई इलाकों में प्रदूषण स्तर ‘गंभीर (Severe)’ श्रेणी को पार कर गया। आपातकालीन उपायों और प्रतिबंधों के बावजूद हालात में कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा है।

AQI 380 पर, कई इलाकों में ‘Severe’ स्तर पार

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, रविवार सुबह दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 380 रहा, जो शनिवार के 360 की तुलना में और भी खराब है। शहर के कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हालात ज्यादा चिंताजनक रहे ।जहांगीरपुरी – 438, बवाना – 431, आनंद विहार – 427, अशोक विहार – 421 इन सभी क्षेत्रों में AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में रहा, जिसमें सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे खतरनाक प्रदूषक PM2.5 का स्तर शनिवार सुबह 7 बजे 312 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ—जो WHO की सुरक्षित सीमा से 20 गुना अधिक है।

वर्क-फ्रॉम-होम नियम अब Stage III में लागू

बढ़ते प्रदूषण के मद्देनज़र कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 नवंबर को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) में संशोधन किया है। नए नियमों के तहत ,पहले जो उपाय Stage IV (AQI 450+) पर लागू होते थे, अब वे Stage III (AQI 401–450) से ही लागू किए जाएंगे। इसमें सबसे बड़ा बदलाव है
सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% वर्क-फ्रॉम-होम की व्यवस्था। इसके बाद दिल्ली सरकार ने शनिवार को निजी कार्यालयों को निर्देश दिया कि वे आधे कर्मचारियों को घर से काम करने दें और आधे को दफ्तर बुलाएँ। साथ ही, भीड़ कम करने के लिए दफ्तरों के समय में भी बदलाव किया गया, MCD दफ्तर — सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के दफ्तर — सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक । स्कूलों में आउटडोर खेल गतिविधियाँ पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के अमिकस क्यूरी ने चेतावनी दी कि बच्चों को ऐसी हवा में खेलने भेजना, “उन्हें गैस चैम्बर में भेजने जैसा है।”

मौसम बना मुसीबत: कम हवा, धुंध और नमी ने बिगाड़ी स्थिति

दिल्ली-NCR में प्रदूषण को और गंभीर बनाने में मौसम की बड़ी भूमिका है।
IMD का अनुमान है कि अगले कई दिनों तक ,हवा की गति 5 किमी/घंटा से भी कम, शैलो से मीडियम फॉग, और उच्च नमी जैसे हालात बने रहेंगे, जिसके कारण प्रदूषक ज़मीन के पास ही फंसे रहते हैं।शनिवार सुबह शहर घने स्मॉग की चादर में लिपटा दिखा। दृश्यता 800–900 मीटर तक ही सीमित रही।

अस्पतालों में मरीजों की बाढ़ सभी आयु समूह प्रभावित

ऐसे हालात में अस्पतालों में भीड़ लगातार बढ़ रही है।
AIIMS के प्रोफेसर डॉ. अनंत मोहन का कहना है कि स्थिति “बेहद गंभीर और जीवन-घातक” हो चुकी है।अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज आ रहे हैं जो, घरघराहट, तेज़ सांस चलना, आंखों में जलन, और COPD की खराब स्थिति जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। LocalCircles के सर्वे में भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है—
दिल्ली-NCR के 80% घरों में कम से कम एक व्यक्ति पिछले एक महीने में खराब हवा की वजह से बीमार हुआ है।

निर्माण स्थलों पर धड़ाधड़ दौरे, कई यूनिटें सील

प्रदूषण पर नकेल कसने के लिए प्रशासन ने 2,000 से ज़्यादा निरीक्षण कर्मी तैनात किए हैं। पिछले कुछ दिनों में, 1,200 से अधिक निरीक्षण किए गए, 200 शो-कॉज़ नोटिस जारी हुए, 50 साइटों पर तुरंत बंदी का आदेश दिया गया। इनमें वे स्थान शामिल हैं जहाँ, धूल नियंत्रण मानकों का पालन नहीं हो रहा था, कंस्ट्रक्शन मटेरियल खुले में पड़ा था, या औद्योगिक इकाइयों में अनियंत्रित उत्सर्जन दर्ज हुआ।

आखिर दिल्ली में हालात इतने खराब क्यों?

विशेषज्ञ बताते हैं कि दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब होने की कई वजहें एक साथ मिलकर काम करती हैं

✓स्थानीय उत्सर्जन – वाहन, निर्माण धूल, औद्योगिक धुआं

✓मौसम – हवा की कम रफ्तार और तापमान में गिरावट

✓पराली धुआं – पंजाब-हरियाणा से आने वाला प्रदूषण

✓भौगोलिक संरचना – दिल्ली की भू-आकृति प्रदूषकों को बाहर निकलने नहीं देती

इन सभी कारकों के कारण सर्दियों में प्रदूषण चरम पर पहुंच जाता है।

जनता क्या कर सकती है? विशेषज्ञों की सलाह

जब तक हवा में सुधार नहीं आता, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और प्रदूषण वैज्ञानिक कुछ उपाय सुझाते हैं N95 या KN95 मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें , सुबह-शाम बाहर टहलने या वर्कआउट से बचें, घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें, खिड़कियाँ-दारवाज़े बंद रखें, विशेषकर सुबह, बच्चे, बुजुर्ग और अस्थमा/COPD मरीज बाहर कम जाएं, पानी ज्यादा पिएं और विटामिन-C युक्त चीज़ें लें

क्या आने वाले दिनों में राहत मिलेगी?

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, अब से 4–5 दिन तक हवा की गति बेहद कम रहने की आशंका है। इसका मतलब यह है कि प्रदूषण के कम होने की संभावना फिलहाल बहुत कम है। CAQM और दिल्ली सरकार ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर और भी कड़े उपाय लागू किए जा सकते हैं, जिनमेंडीज़ल वाहनों पर प्रतिबंध, निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण रोक जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

निष्कर्ष

दिल्ली इस समय एक गंभीर स्वास्थ्य आपदा से जूझ रही है। लगातार दस दिनों से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में फंसी हवा राजधानी के करोड़ों लोगों की सेहत पर सीधा असर डाल रही है। प्रशासन की सख्ती, GRAP के नए नियम और मौसम में थोड़े बदलाव के बिना हालात सुधरना मुश्किल है। फिलहाल दिल्लीवासियों को सतर्क रहना होगा और प्रदूषण से बचाव के सभी उपाय अपनाने होंगे।