India: Cheteshwar Pujara Retirement: 103 टेस्ट, 7,195 रन, 19 शतक। जानिए पुजारा की टॉप 5 पारियां, विराट कोहली के साथ साझेदारी और भारतीय टेस्ट क्रिकेट में उनकी विरासत।
Cheteshwar Pujara ने कहा अलविदा: टीम इंडिया के ‘वॉल 2.0’ की 15 साल की शानदार टेस्ट यात्रा

भारतीय टेस्ट क्रिकेट का एक सुनहरा अध्याय 24 अगस्त 2025 को खत्म हो गया, जब चेटेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) ने सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी। पुजारा ने 15 साल तक भारतीय क्रिकेट टीम की नंबर-3 पोज़ीशन पर खड़े होकर वह मजबूती दी, जिसे कभी राहुल द्रविड़ के नाम से जाना जाता था। अपने शांत स्वभाव, अटूट धैर्य और ठोस तकनीक के दम पर पुजारा को फैंस ने प्यार से “India’s Wall 2.0” का नाम दिया।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे पुजारा का पूरा करियर सफर, उनकी बेहतरीन पारियां, विराट कोहली के साथ उनकी साझेदारियां और वह विरासत जो भारतीय क्रिकेट को हमेशा प्रेरित करेगी।
चेटेश्वर पुजारा का करियर रिकॉर्ड
मैच खेले: 103 टेस्ट
कुल रन: 7,195
औसत: 43.60
शतक: 19
अर्धशतक: 35
गेंदों का सामना: 16,217 (भारतीय क्रिकेट में गिनती के बल्लेबाज़ इतने लंबे समय तक क्रीज़ पर टिके)
पुजारा का खेल सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि उस संघर्ष और जज्बे में छुपा है जिसने भारत को मुश्किल हालात में जीत दिलाई।
पुजारा की टॉप 5 टेस्ट पारियां

- 123 (246 गेंद) बनाम ऑस्ट्रेलिया, एडिलेड 2018
भारतीय टीम 19/3 पर लड़खड़ा चुकी थी, लेकिन पुजारा ने काउंटर-अटैक करते हुए मैच का रुख बदल दिया। इस शतक की बदौलत भारत ने न सिर्फ टेस्ट जीता बल्कि 2018/19 में ऑस्ट्रेलिया की धरती पर ऐतिहासिक सीरीज़ जीत की नींव रखी।
- 206 (389 गेंद) बनाम इंग्लैंड, अहमदाबाद 2012*
यही वह पारी थी जिसने दुनिया को दिखा दिया कि टीम इंडिया को नया द्रविड़ मिल गया है। अपनी पहली डबल सेंचुरी लगाकर पुजारा ने मैच को भारत की झोली में डाला।
- 202 (525 गेंद) बनाम ऑस्ट्रेलिया, रांची 2017
525 गेंदों का सामना कर भारतीय इतिहास में सबसे लंबी टेस्ट पारी खेली। इस मैराथन पारी ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों की कमर तोड़ दी और भारत को मैच बचाने में मदद की।
- 153 (270 गेंद) बनाम साउथ अफ्रीका, जोहान्सबर्ग 2013
दक्षिण अफ्रीका की तेज पिच पर, डेल स्टेन, मोर्ने मोर्कल और फिलेंडर जैसे दिग्गजों के खिलाफ यह पारी पुजारा की क्लासिक बैटिंग का प्रमाण थी।
- 56 (211 गेंद) बनाम ऑस्ट्रेलिया, ब्रिस्बेन 2021
सिर्फ 56 रन, लेकिन यह पारी भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बहादुर पारियों में गिनी जाएगी। पैट कमिंस, स्टार्क और हेज़लवुड की घातक गेंदबाज़ी झेलते हुए पुजारा ने कई बार शरीर पर गेंद खाई, लेकिन क्रीज़ नहीं छोड़ी। इस जज़्बे ने भारत को गाबा में 32 साल बाद जीत दिलाई और सीरीज़ 2-1 से भारत के नाम हुई।
पुजारा बनाम दुनिया के टॉप गेंदबाज़
पुजारा सिर्फ रन बनाने वाले बल्लेबाज़ नहीं थे, बल्कि दुनिया के बेहतरीन गेंदबाज़ों के लिए सबसे बड़ी चुनौती थे।
जेम्स एंडरसन के खिलाफ: 261 रन
मिशेल स्टार्क के खिलाफ: 248 रन
जोश हेज़लवुड के खिलाफ: 238 रन
स्टुअर्ट ब्रॉड के खिलाफ: 195 रन
पैट कमिंस के खिलाफ: 180 रन
यानी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज पेसर्स के खिलाफ पुजारा ही वह बल्लेबाज़ थे जिन्होंने लगातार 150+ रन बनाए।
विराट कोहली और पुजारा: सुनहरी साझेदारी
आर. अश्विन ने एक बार कहा था – “कोहली ने रन इसलिए बनाए क्योंकि पुजारा उनके आगे ढाल बनकर खड़े थे।”
पुजारा और कोहली की साझेदारी भारतीय टेस्ट क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद जोड़ी रही।
3,438 रन साथ मिलकर
17 बार 50+ साझेदारी
7 बार 100+ साझेदारी
यह आंकड़े बताते हैं कि कैसे पुजारा के कंधों पर दबाव लेने से विराट कोहली को खुलकर खेलने का मौका मिला।
पुजारा की जुझारू पारियां: सिर्फ रन नहीं, इमोशन्स भी
सिडनी 2019: ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों के खिलाफ धैर्य से खेलते हुए सीरीज़ भारत के नाम की।
वांडरर्स 2018: 53 गेंद बिना रन बनाए झेले, लेकिन आउट नहीं हुए। पिच इतनी खतरनाक थी कि गेंदबाज़ भी थक गए।
सिडनी 2021: 77 रन बनाकर मैच बचाया और सीरीज़ जिंदा रखी।
भारतीय जीतों में पुजारा का योगदान
पुजारा ने 41 टेस्ट में 11 जीतों में अहम भूमिका निभाई।
इन जीतों में उन्होंने 773 रन बनाए (2 शतक, 5 अर्धशतक)।
गाबा 2021 और सिडनी 2019 जैसी ऐतिहासिक जीतें उनकी grit के बिना अधूरी थीं।
क्रिकेट जगत की प्रतिक्रियाएँ
सचिन तेंदुलकर ने कहा:
“पुजारा, तुम्हें नंबर 3 पर देखना हमेशा सुकून देता था। 2018 की ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ तुम्हारी बदौलत भारत ने जीती। तुम्हें शुभकामनाएं।”
BCCI ने ट्वीट किया:
“भारतीय क्रिकेट के सबसे धैर्यवान और जुझारू बल्लेबाज़ों में से एक। 103 टेस्ट, 7,195 रन और 19 शतक। धन्यवाद पुजारा।”
पुजारा की विरासत (Legacy)
भारतीय टेस्ट क्रिकेट को उन्होंने फिर से धैर्य और क्लासिक बैटिंग की अहमियत सिखाई।
एक ऐसा खिलाड़ी जिसने साबित किया कि T20 के दौर में भी डिफेंसिव टेक्निक जीत दिला सकती है।
उनकी पारी सिर्फ स्कोरकार्ड नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सबक है – “धैर्य ही जीत की चाबी है।”
चेटेश्वर पुजारा का करियर केवल रन बनाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को वह backbone दिया, जिसकी वजह से भारत ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमों को उन्हीं की सरज़मीं पर हराया।उनका नाम हमेशा भारतीय क्रिकेट इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। जब भी भारतीय फैंस “गाबा 2021”, “एडिलेड 2018” या “रांची 2017” की बात करेंगे, पुजारा का चेहरा ज़रूर याद आएगा।पुजारा का रिटायरमेंट भले ही एक युग का अंत हो, लेकिन उनकी grit और patience आने वाले हर युवा बल्लेबाज़ के लिए प्रेरणा रहेगा।

