भारत का National space day 2025:मोदी की अंतरिक्ष योजनाएँ और Bharatiya Antariksh Station by2035

प्रधानमंत्री मोदी ने National Space Day 2025 पर भारत के स्वदेशी ,(Bharatiya Antariksh Station – BAS) का अंतरिक्ष यात्री पूल और निजी क्षेत्र की बड़ी योजनाओं का ऐलान किया। जानिए पूरी जानकारी इस लेख मे।

भारत का अंतरिक्षीय स्वर्णिम काल : दूसरा National space day 2025 और प्रधानमंत्री मोदी की घोषणाएँ Bharatiya Antariksh Station-2035

भारत ने 23 अगस्त 2025 को अपना दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (National Space Day) मनाया। यह वही तारीख है जब 2023 में चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग की थी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश के माध्यम से देश को संबोधित किया और भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घोषणाएँ कीं।

मोदी ने न केवल महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए बल्कि भारत को अंतरिक्ष की अगली कतार में लाने वाली योजनाओं का खाका भी प्रस्तुत किया। इस अवसर पर ISRO ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS) का मॉडल भी प्रस्तुत किया।

National Space Day 2025:प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी घोषणाएँ Bhartiya Antariksh Station by2035

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अब चंद्रमा और मंगल की सतह तक पहुँच चुका है और अब अगला कदम डीप स्पेस (Deep Space) की ओर है। उन्होंने युवाओं, वैज्ञानिकों और निजी क्षेत्र को चुनौती देते हुए कहा:
क्या भारत अगले 5 वर्षों में स्पेस सेक्टर में पाँच यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स बना सकता है?
क्या निजी क्षेत्र सालाना 50 रॉकेट लॉन्च करने की क्षमता हासिल कर सकता है?
यह घोषणाएँ स्पष्ट रूप से भारत की स्पेस इकॉनमी को तेज़ी से बढ़ाने की दिशा में एक नई शुरुआत हैं।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) – भारत का नया अध्याय

इस आयोजन में ISRO ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS) का मॉडल पेश किया।

मुख्य बिंदु:

पहले मॉड्यूल BAS-01 का वजन लगभग 10 टन होगा।

इसे वर्ष 2028 तक लॉन्च करने का लक्ष्य है।

पूरा स्टेशन 2035 तक पाँच मॉड्यूल के साथ पूरी तरह कार्यशील होगा।

यह स्टेशन पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर की कक्षा में परिक्रमा करेगा।

इसमें पूरी तरह स्वदेशी तकनीक होगी – पर्यावरण नियंत्रण, जीवन समर्थन प्रणाली, डॉकिंग मैकेनिज़्म और ऊर्जा आपूर्ति।

इस उपलब्धि के बाद भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा देश होगा जिसका खुद का अंतरिक्ष स्टेशन होगा।

स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियों की भूमिका

मोदी ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि 2014 में भारत में सिर्फ 1-2 स्पेस स्टार्टअप्स थे, जबकि आज इनकी संख्या 350 से अधिक हो चुकी है।

प्रमुख भारतीय स्टार्टअप्स:

Skyroot Aerospace – रॉकेट लॉन्च वाहन निर्माण

Agnikul Cosmos – 3D प्रिंटेड इंजन तकनीक

Pixxel – उपग्रह आधारित पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation)

Dhruva Space – सैटेलाइट निर्माण और सेवाएँ

Digantara – अंतरिक्ष कचरे की निगरानी (Space Debris Tracking)

सरकार का लक्ष्य है कि निजी कंपनियाँ जल्द ही PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) का निजी संस्करण लॉन्च करेंगी और भारत का पहला निजी संचार उपग्रह भी कक्षा में स्थापित होगा।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी और उपग्रह तारामंडल

मोदी ने घोषणा की कि सरकार और निजी कंपनियों के सहयोग से एक Earth Observation Constellation (पृथ्वी अवलोकन उपग्रह तारामंडल) तैयार किया जा रहा है। इससे भारत न केवल अपनी रक्षा और कृषि अनुसंधान को मज़बूत करेगा बल्कि जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।

अंतरिक्ष यात्री पूल (Astronaut Pool)

अब तक भारत में अंतरिक्ष यात्रियों का चयन मुख्यतः वायुसेना के पायलटों से होता था। लेकिन अब ISRO ने घोषणा की है कि जल्द ही एक राष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्री पूल (Astronaut Pool) बनाया जाएगा।

इसमें शामिल होंगे:

महिलाएँ

वैज्ञानिक

इंजीनियर

विभिन्न पेशेवर पृष्ठभूमि से प्रतिभाशाली युवा

यह कदम भारत को अंतरिक्ष यात्राओं में अधिक विविधता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता देगा।

शौर्य का प्रतीक – ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला

भारत ने पिछले दो दशकों में अंतरिक्ष विज्ञान में बड़ी छलांग लगाई है।

चंद्रयान-1 (2008) – चंद्रमा पर पानी की खोज

मंगलयान (2013) – सबसे किफ़ायती मार्स मिशन

चंद्रयान-3 (2023) – दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग

गगनयान (2025-26, अपेक्षित) – पहला मानवयुक्त मिशन

अब भारत का लक्ष्य है:

2027 तक चंद्रयान-4

2028 में शुक्रयान मिशन (Venus Orbiter)

2030 के बाद डीप स्पेस मिशन

भारत आज एक नए अंतरिक्षीय युग की दहलीज पर खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणाएँ न केवल भारत के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मज़बूत करती हैं, बल्कि निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और युवाओं को भी नई ऊर्जा देती हैं।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, अंतरिक्ष यात्री पूल, और निजी उपग्रह-रॉकेट कार्यक्रम आने वाले वर्षों में भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बनाएँगे।

भारत अब सिर्फ अंतरिक्ष तक पहुँचने का सपना नहीं देख रहा, बल्कि मानवता के भविष्य के लिए अंतरिक्ष में समाधान खोजने की दिशा में अग्रसर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  1. राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

उत्तर: राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस हर साल 23 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिन 2023 में भारत का चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरा था, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

  1. भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) कब तक पूरा होगा?

उत्तर: भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 तक लॉन्च किया जाएगा और पूरा स्टेशन 2035 तक पाँच मॉड्यूल्स के साथ कार्यशील होगा।

  1. क्या भारत के पास अंतरिक्ष यात्री पूल (Astronaut Pool) होगा?

उत्तर: हाँ, प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की है कि अब भारत अपना राष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्री पूल बनाएगा। इसमें केवल वायुसेना पायलट ही नहीं बल्कि महिलाएँ, वैज्ञानिक और विभिन्न पेशेवरों को भी शामिल किया जाएगा।

  1. भारत में स्पेस स्टार्टअप्स कितने हैं?

उत्तर: 2014 में जहाँ सिर्फ 1-2 स्टार्टअप्स थे, वहीं अब भारत में 350 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। इनमें Skyroot, Agnikul, Pixxel, Dhruva Space, Digantara जैसी कंपनियाँ अग्रणी हैं।

  1. भारत के अगले बड़े अंतरिक्ष मिशन कौन-कौन से हैं?

उत्तर:

चंद्रयान-4 (2027)

शुक्रयान मिशन (2028)

गगनयान मानव मिशन (2025-26, अपेक्षित)

डीप स्पेस मिशन (2030 के बाद)

  1. भारत का अंतरिक्ष स्टेशन किन देशों की बराबरी करेगा?

उत्तर: भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के बन जाने के बाद भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा देश होगा, जिसका अपना स्वतंत्र अंतरिक्ष स्टेशन होगा।

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