Silver Price Today, भारत में चाँदी की कीमतें बुधवार को नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गईं, जो न केवल घरेलू मुद्रा के रिकॉर्ड कमजोर होने का परिणाम है, बल्कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती सप्लाई कमी और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व (Fed) की संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीदों से भी प्रेरित है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चाँदी के मार्च 2026 फ्यूचर्स ₹1,84,727 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गए—यह अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है। इसी बीच भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार 90 का स्तर तोड़ा और 90.14 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया। रुपये में लगातार छह सत्रों से गिरावट जारी है, जिसने चाँदी और सोने जैसे आयात-निर्भर कीमती धातुओं की कीमतों को और ज्यादा महँगा बना दिया है।
Indian रुपये में ऐतिहासिक कमजोरी: आयात महँगा
रुपये की गिरावट ने भारतीय बाजारों में चाँदी और सोने की कीमतों में तेजी को और तेज कर दिया है। डॉलर की मांग बढ़ने, भारतीय बैंकों की उच्च खरीद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली और लंबित भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता ने सेंटीमेंट को कमजोर किया है। रुपया गिरकर: 90.14 प्रति डॉलर (सर्वकालिक निम्न स्तर) वर्ष-दर-वर्ष गिरावट: लगभग 5%, एशिया में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा ANZ के विदेशी मुद्रा रणनीतिकार धीरज निम ने कहा, “जब तक व्यापार समझौता नहीं होता, भारत के लिए इस प्रकार का आर्थिक समायोजन जरूरी है।” रुपये की कमजोरी का सीधा असर चाँदी की घरेलू कीमतों पर पड़ा है, क्योंकि भारत अपनी अधिकांश चाँदी विदेशों से आयात करता है।
MCX पर चाँदी और सोना दोनों चढ़े
✓MCX Silver March 2026: +₹3,126 बढ़कर ₹1,84,727/किलो
✓MCX Gold February 2026: +₹1,007 बढ़कर ₹1,30,766/10 ग्राम
✓चाँदी में 1.72% और सोने में 0.77% की तेजी दर्ज की गई। निवेशकों में सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की तरफ रुझान भी बढ़ा है।
वैश्विक बाजारों में चाँदी की रिकॉर्ड रैली
✓अंतरराष्ट्रीय COMEX पर भी चाँदी नई ऊँचाइयों पर पहुँची:
✓COMEX Silver (Dec): $58.90/oz (1.6% उछाल)
✓COMEX Silver (Mar): $59.65/oz (1.62% उछाल सर्वकालिक उच्च स्तर)
क्यों बढ़ रही है वैश्विक चाँदी की कीमत?
✓चीन के गोदामों में ऐतिहासिक कमी, शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज से जुड़े वेयरहाउसों में चाँदी का स्टॉक 2015 के बाद सबसे कम।
✓लंदन को रिकॉर्ड निर्यात, चीन ने अक्टूबर में लंदन को 660 टन चाँदी निर्यात की यह एक महीने में अब तक का सबसे बड़ा निर्यात।
✓लगातार पाँचवें साल वैश्विक चाँदी की कमी, सिल्वर इंस्टीट्यूट के अनुसार 2021-2025 के बीच कुल 820 मिलियन औंस की सप्लाई कमी हो चुकी है।
विश्लेषक ज़ियेजी वू के अनुसार: “यह टाइटनेस लंदन को बढ़ती शिपमेंट और इंडस्ट्रियल डिमांड से पैदा हुई है।”
इंडस्ट्रियल डिमांड ने बढ़ाया दबाव: सोलर पैनल सबसे बड़ा कारण
चाँदी केवल आभूषण नहीं, बल्कि आधुनिक टेक्नोलॉजी की रीढ़ है। सबसे अधिक चाँदी खपत वाले सेक्टर:
- सोलर पैनल – 232 मिलियन औंस वार्षिक खपत
- इलेक्ट्रिक व्हीकल (EVs)
- इलेक्ट्रॉनिक्स और माइक्रोचिप्स
- मेडिकल उपकरण
री-न्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के तेज विकास ने चाँदी की औद्योगिक मांग को ऐतिहासिक स्तर पर पहुँचा दिया है।
फेड रेट कट की उम्मीद और डॉलर इंडेक्स का दबाव
CME FedWatch Tool के अनुसार: 87% संभावना है कि 9-10 दिसंबर की FOMC मीटिंग में फेड 25 bps रेट कट करेगा। रेट कट की उम्मीदों ने निवेशकों को सोने-चाँदी में सुरक्षित निवेश बढ़ाने पर मजबूर किया है। रिलायंस सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी के अनुसार:
“सोना $4,220 प्रति औंस तक चढ़ा है, क्योंकि बाजार फेड की सख्ती कम होने की उम्मीद कर रहा है।” फ़ेड चेयर में बदलाव की अटकलें भी बढ़ा रहीं तेजी, बाजार में चर्चा है कि केविन हैसेट जेरोम पॉवेल की जगह ले सकते हैं। दुबला (dovish) दृष्टिकोण बुलियन को और सपोर्ट दे रहा है।
आगे क्या? बाजार की निगाहें दो प्रमुख डेटा पर:
- ADP रोजगार रिपोर्ट
- सितंबर PCE मुद्रास्फीति डेटा
ये दोनों रिपोर्टें फेड की ब्याज दर नीति को लेकर अंतिम संकेत देंगी। भारत में चाँदी की कीमतें कहाँ जा सकती हैं?
यदि रुपया और कमजोर होता है, वैश्विक सप्लाई संकट गहराता है, फेड रेट कट होता है, और इंडस्ट्रियल मांग बढ़ती रहती है, तो चाँदी की घरेलू कीमतें ₹1.90 लाख से भी ऊपर जा सकती हैं,
और 2026 में यह ₹2 लाख प्रति किलो के स्तर को भी छू सकती है।
निष्कर्ष: चाँदी का बुल रन जारी, निवेशकों के लिए अहम समय
चाँदी की कीमतों की मौजूदा तेजी सिर्फ एक दिन का उछाल नहीं, बल्कि पाँच प्रमुख कारकों का संयोजन है: कमजोर भारतीय रुपया, वैश्विक सप्लाई संकट, इंडस्ट्रियल मांग, फेड रेट कट उम्मीद, निवेशकों का सुरक्षित संपत्तियों में रुझान, इससे संकेत मिलता है कि चाँदी भविष्य में भी मजबूत बनी रह सकती है।
निवेशकों को वैश्विक डेटा और रुपये की चाल पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए।
