Delhi Air Quality : दिवाली एयर प्रदूषण के कारण दिल्ली AQI level 564 के पार

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2025: Delhi Air Quality AQI level 564 के पार, रोशनी और खुशियों के त्योहार दिवाली ने इस बार राजधानी दिल्ली के आसमान को चमकाने के बजाय धुएं और धूल से ढक दिया। दिवाली की रात के बाद दिल्ली की वायु गुणवत्ता (Air Quality) में तेज गिरावट दर्ज की गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 24 घंटे में बढ़कर 564 तक पहुंच गया, जो कि “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। यह पिछले दिन के 326 से भी अधिक है।

राजधानी की सांसों पर संकट,क्या कह रहे हैं आंकड़े?

और सबसे चिंताजनक बात यह रही कि दिल्ली के 38 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों में से 34 रेड जोन में पहुंच गए  यानी हवा इतनी खराब हो गई कि साँस लेना भी मुश्किल हो गया। पर्यावरण विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, दिवाली की अगली सुबह तक हवा की गुणवत्ता कई इलाकों में ‘गंभीर’ श्रेणी में चली गई। दिल्ली के प्रमुख इलाकों का हाल कुछ यूँ रहा: द्वारका: AQI 417,वजीरपुर: AQI 423,अशोक विहार: AQI 404,आनंद विहार: AQI 404 इन चारों क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ स्तर पर रही, जबकि शेष 30 क्षेत्रों में ‘बहुत खराब’ श्रेणी दर्ज की गई।विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक हालात और बिगड़ सकते हैं क्योंकि हवा की रफ्तार कम है और प्रदूषणकण वातावरण में फँसे हुए हैं।

दिवाली का धुआं कैसे बना जहर?

दिवाली पर हर साल पटाखों का धुआं और वाहनों से निकलने वाला धुआं मिलकर प्रदूषण को चरम पर पहुंचा देता है। इस बार भी यही हुआ।

✓ पटाखों से निकला धुआं

दिवाली की रात दिल्ली-NCR में लाखों की संख्या में पटाखे फोड़े गए। इससे सूक्ष्म कण (PM2.5 और PM10) का स्तर कई गुना बढ़ गया। रात के समय हवा की गति लगभग स्थिर थी, जिससे यह धुआं पूरे शहर में जम गया और वायु गुणवत्ता गिर गई।

✓ वाहनों और ट्रैफिक जाम का असर

दिवाली की खरीदारी और घर लौटते लोगों के कारण सड़कों पर भारी ट्रैफिक था। पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, कुल प्रदूषण में लगभग 15% योगदान वाहनों से आया।

✓ औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण गतिविधियाँ

निर्माण कार्यों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धूल-धुआं प्रदूषण को और बढ़ाता है। रिपोर्ट बताती है कि लगभग 23% प्रदूषण उद्योगों और निर्माण कार्यों से आया।

✓ मौसमी परिस्थितियाँ

ठंडी होती हवा और कम वायु गति के कारण प्रदूषण का फैलाव नहीं हो पाया। मौसम विशेषज्ञ इसे “इन्वर्सन प्रभाव” कहते हैं — जहाँ ठंडी हवा प्रदूषक कणों को जमीन के पास फँसा देती है।

स्वास्थ्य पर असर ,सांस लेना हुआ मुश्किल

जब AQI 300 से ऊपर चला जाता है, तो हवा सभी लोगों के लिए हानिकारक बन जाती है। 400 से अधिक AQI का मतलब है ‘गंभीर’ श्रेणी, जिसमें यहां तक कि स्वस्थ व्यक्ति भी सांस लेने में परेशानी महसूस कर सकता है।

संभावित स्वास्थ्य जोखिम: आँखों में जलन और पानी आना, गले में खराश और खांसी, सीने में भारीपन, अस्थमा और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा, हृदय रोगियों के लिए अतिरिक्त जोखिम और डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग इन दिनों एन95 या एन99 मास्क पहनें, बाहर की गतिविधियों को कम करें और बच्चों व बुजुर्गों को प्रदूषण से दूर रखें।

सरकार और प्रशासन की पहल

दिल्ली सरकार और Commission for Air Quality Management (CAQM) ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए Graded Response Action Plan (GRAP) के स्टेज-II को सक्रिय कर दिया है।इसके तहत:

निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर सख्ती

सड़कों की सफाई और पानी का छिड़काव

डीजल जनरेटरों के उपयोग पर प्रतिबंध

वाहनों की आवाजाही पर निगरानी

सुप्रीम कोर्ट ने भी दिवाली से पहले पटाखों के इस्तेमाल पर निर्देश जारी किए थे कि केवल ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) ही सीमित समय में जलाए जा सकते हैं, लेकिन आदेशों का पालन बहुत कम हुआ।

जनता क्या कर सकती है?

सिर्फ सरकारी कार्रवाई से यह समस्या खत्म नहीं होगी। नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।

क्या करें:

अनावश्यक वाहन प्रयोग न करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट या कार-पूलिंग अपनाएं।

घर और ऑफिस में एयर-प्यूरिफायर का प्रयोग करें।

पेड़-पौधों की देखभाल करें, और वृक्षारोपण अभियान में शामिल हों।

पटाखों का प्रयोग बंद करें, या कम से कम सीमित मात्रा में और ग्रीन विकल्प अपनाएं।

प्रदूषण से जुड़े ऐप्स (जैसे SAFAR या AQI India) पर निगरानी रखें। दिल्ली में वायु प्रदूषण हर साल दिवाली के आसपास चरम पर पहुँचता है, लेकिन समाधान हमेशा अस्थायी ही रहा है। अगर शहर को ‘गैस चेंबर’ बनने से बचाना है, तो अब स्थायी नीति बनानी होगी।

सरकार की क्या भूमिका होनी चाहिए?

पूरे NCR क्षेत्र में एक समान प्रदूषण नियंत्रण नीति लागू करे।

उद्योगों को क्लीन-एनर्जी की ओर स्थानांतरित करे।

सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दे।

स्कूलों में “पर्यावरण शिक्षा” को व्यवहारिक रूप में लागू करे।

 निष्कर्ष

दिवाली रोशनी और खुशियों का त्योहार है — लेकिन अगर उसी उत्सव की कीमत हमारी साँसें बन जाएँ, तो यह जश्न अधूरा है।दिल्ली की हवा ने इस बार फिर चेतावनी दी है कि उत्सव और पर्यावरण का संतुलन जरूरी है।हम सभी अगर छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ निभाएँ — जैसे पटाखे न फोड़ना, पौधे लगाना, वाहनों का कम इस्तेमाल करना — तो आने वाले वर्षों में दिल्ली का आसमान फिर से नीला हो सकता है।

अगली दिवाली पर संकल्प लें — कम धुआँ, ज़्यादा उजाला और स्वच्छ हवा।