Gita Gopinath एक भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं IMF की डिप्टी MD गीता गोपीनाथ ने चेताया — दुनिया $35 ट्रिलियन की दौलत के विनाश की कगार पर है।
उनके अनुसार, वित्तीय बाजारों में "जोखिम का गलत मूल्यांकन" और अत्यधिक उधारी सबसे बड़ा खतरा है।
गीता ने कहा — "हम एक ऐसे बुलबुले में हैं जो किसी भी समय फट सकता है, और प्रभाव 2008 से बड़ा होगा।"
अगर बाज़ार गिरता है, तो शेयर, बांड, और रियल एस्टेट तीनों में भारी गिरावट होगी — कुल $35 ट्रिलियन संपत्ति मिट सकती है।
केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियाँ और ऊंची ब्याज दरें ऋण संकट को और बढ़ा रही हैं।
उन्होंने कहा — भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक युद्ध बाजारों को अस्थिर बना रहे हैं।
गीता ने निवेशकों को सलाह दी — “अंधेरे में चमकते बुल मार्केट से सावधान रहें, डेटा को समझें।”
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारें कर्ज घटाएं, पारदर्शिता बढ़ाएं और नियम मजबूत करें।
भारत, ब्राज़ील, तुर्की जैसे देशों पर पूंजी बहिर्गमन का सबसे बड़ा खतरा है।
गीता का निष्कर्ष — “संतुलित नीतियाँ ही भविष्य बचा सकती हैं। वित्तीय अनुशासन ही नई सुरक्षा दीवार है।”