Mann Ki Baat PM Modi, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात की 126वीं कड़ी में देशवासियों से संवाद किया। इस बार का मन की बात कई मायनों में विशेष रहा क्योंकि इसमें भारत की महान विभूतियों की जयंती, नारी शक्ति की गाथा, भारतीय संस्कृति का वैश्विक महत्व और स्वदेशी अभियान की नई दिशा पर चर्चा हुई। आइए विस्तार से जानते हैं
शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि
मोदी जी ने कार्यक्रम की शुरुआत शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि भगत सिंह न केवल साहस के प्रतीक थे, बल्कि युवाओं के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे। फांसी से पहले उनका अंग्रेजों को लिखा पत्र उनकी निडरता और जज़्बे को दर्शाता है। भगत सिंह ने कहा था कि हमें युद्धबंदी की तरह गोली मार दी जाए, फांसी न दी जाए। उनके बलिदान ने करोड़ों भारतीयों को आज़ादी के संघर्ष में प्रेरित किया।
लता मंगेशकर की जयंती और संगीत का महत्व
प्रधानमंत्री ने भारत की सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर जी को भी उनकी जयंती पर याद किया। उनके गीतों में भारतीय संस्कृति और भावनाओं की गहरी झलक मिलती है। देशभक्ति गीतों ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत तक लोगों को प्रेरित किया। लता दीदी का प्रधानमंत्री के साथ राखी का विशेष रिश्ता भी उल्लेखनीय रहा। मोदी जी ने कहा कि लता दीदी के गीतों में भावनाओं की ऐसी शक्ति है जो पीढ़ियों तक लोगों को जोड़ती रहेगी।
भारतीय नौसेना की बेटियों का अद्भुत साहस
मन की बात में प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना की दो बहादुर महिला अधिकारियों — लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा — से सीधी बातचीत करवाई। इन दोनों ने नाविका सागर परिक्रमा के तहत 238 दिनों में 47,500 किमी की वैश्विक समुद्री यात्रा पूरी की। उन्होंने तीन साल तक कठिन प्रशिक्षण लिया और तूफानी समुद्र, कड़कड़ाती ठंड और ऊंची लहरों का सामना किया। पो निमो (दुनिया का सबसे दूरस्थ स्थान) पर भारतीय तिरंगा फहराने वाली ये पहली भारतीय महिलाएं बनीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन दोनों की साहसिक उपलब्धि देश की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
छठ पूजा और भारतीय संस्कृति का वैश्विक महत्व
प्रधानमंत्री ने छठ पूजा को लेकर एक बड़ी घोषणा की। भारत सरकार इसे UNESCO की Intangible Cultural Heritage List में शामिल करने के प्रयास कर रही है। इससे पहले कोलकाता की दुर्गा पूजा को भी UNESCO सूची में स्थान मिला था। दिवाली के बाद मनाया जाने वाला यह पर्व सूर्यदेव को समर्पित है। अब यह न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रहा है।
गांधी जयंती और स्वदेशी का महत्व
मोदी जी ने 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर लोगों से खादी और स्वदेशी उत्पाद अपनाने का आग्रह किया। खादी की बिक्री पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि लोग सोशल मीडिया पर #ShotVocalForLocal अभियान को साझा करें। हाथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र में नवाचार से बड़ी संभावनाएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने तमिलनाडु, झारखंड और बिहार के कई उद्यमियों के उदाहरण दिए जिन्होंने परंपरा को आधुनिकता से जोड़कर रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह खोली।
आरएसएस की 100वीं वर्षगांठ
इस बार विजयादशमी खास है क्योंकि इसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि RSS ने सेवा और अनुशासन की परंपरा से सदैव राष्ट्र प्रथम की भावना को जीवित रखा है। 1925 में डॉ. हेडगेवार ने संघ की नींव रखी थी। गुरुजी गोलवलकर के विचार “यह मेरा नहीं, राष्ट्र का है” आज भी स्वयंसेवकों को प्रेरित करते हैं।
महर्षि वाल्मीकि और रामायण की धरोहर
मोदी जी ने आने वाली वाल्मीकि जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने मानवता को रामायण जैसा अमूल्य ग्रंथ दिया। भगवान राम के आदर्श, सेवा, सद्भाव और करुणा — आज भी समाज को दिशा देते हैं। अयोध्या में राम मंदिर के साथ ही वाल्मीकि और निषादराज के मंदिर भी बने हैं।
भारतीय कला और वैश्विक पहचान
प्रधानमंत्री ने पेरिस स्थित South मंडप के 50 साल पूरे होने पर शुभकामनाएं दीं। संस्थापक मिलेना साल्विनी को भारत ने पद्मश्री से सम्मानित किया था। इस संस्थान ने भारतीय नृत्य और संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।
भूपेन हजारिका और सांस्कृतिक एकता
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भूपेन हजारिका जी के गीतों का उल्लेख किया जिन्हें श्रीलंका में तमिल और सिंहली भाषाओं में गाया गया। प्रधानमंत्री ने असम के प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग के निधन पर भी शोक व्यक्त किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि संगीत और संस्कृति सीमाओं से परे लोगों को जोड़ते हैं।
आत्मनिर्भर भारत और त्यौहारों का संदेश
त्योहारों के मौसम पर प्रधानमंत्री ने कहा ,स्वच्छता अभियान को भी त्योहारों की तरह जन आंदोलन बनाना चाहिए।खरीदारी करते समय वोकल फॉर लोकल का संकल्प लें। जब हम देसी उत्पाद खरीदते हैं, तो सिर्फ वस्तु नहीं बल्कि किसी परिवार की आशा और एक कारीगर की मेहनत घर लाते हैं।
निष्कर्ष
मन की बात की यह कड़ी भारत की सांस्कृतिक धरोहर, साहस, नारी शक्ति और स्वदेशी संकल्प का संगम रही।शहीद भगत सिंह का बलिदान युवाओं को साहस सिखाता है। लता मंगेशकर की सुर लहरियां भारतीयता को जीवित रखती हैं। भारतीय नौसेना की बेटियों का साहस दुनिया को दिखाता है कि भारत की नारी शक्ति किसी भी चुनौती से पीछे नहीं है। स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल का मंत्र आत्मनिर्भर भारत की ओर एक बड़ा कदम है। आने वाले त्योहारों में यह संदेश हर भारतीय को प्रेरित करेगा कि देश की संस्कृति और आत्मनिर्भरता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
