Silver and Gold Price Today, त्योहारी मांग और रुपये की कमजोरी से सोना-चांदी रिकॉर्ड ऊँचाई पर। चांदी ₹1,41,900/किलो और सोना ₹1,17,700/10ग्राम पर, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी। नवरात्रि और त्यौहारी समय की मांग ने बढ़ाई चमक अब अब मिडिल क्लास लोगों के बस की नहीं सोना चांदी खरीद पाना।
चांदी और सोना ने रचा नया इतिहास नवरात्रि की मांग ने बढ़ाई चमक
नवरात्रि के शुभ अवसर पर भारतीय बाजारों में सोना-चांदी की कीमतों ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बना दिया है। शुक्रवार को चांदी ने ₹1,900 की बड़ी छलांग लगाते हुए ₹1,41,900 प्रति किलोग्राम का अब तक का सबसे ऊँचा स्तर छू लिया। वहीं सोना भी ₹330 की बढ़त के साथ ₹1,17,700 प्रति 10 ग्राम पर जा पहुंचा। यह तेजी उस समय देखने को मिली है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी हल्की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। विदेशी बाजारों में चांदी 0.35% टूटकर $45.03 प्रति औंस और सोना 0.12% गिरकर $3,744.75 प्रति औंस पर आ गया। बावजूद इसके, घरेलू बाजार में मांग की मजबूती ने कीमती धातुओं को रिकॉर्ड स्तर पर बनाए रखा।
चांदी का 2025 में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
साल 2025 चांदी के लिए ऐतिहासिक साबित हो रहा है। वर्ष की शुरुआत से अब तक इसने करीब 59% का शानदार रिटर्न दिया है, जो 2016 के बाद का सबसे मजबूत प्रदर्शन है। सोना भी पीछे नहीं है और इसने लगभग 49% की बढ़त दर्ज की है। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, गुरुवार को चांदी का बंद भाव ₹1,40,000 प्रति किलो था, जबकि शुक्रवार को यह ₹1,41,900 पर पहुंच गया। लगातार रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार ने निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया है।
नवरात्रि और दीवाली का त्योहार बना तेजी का आधार
भारत में पारंपरिक रूप से नवरात्रि और दीवाली का समय सोना-चांदी की खरीदारी के लिए बेहद शुभ माना जाता है। शादियों और त्योहारों में गहनों की मांग अपने चरम पर होती है। इसी मौसमी मांग ने इस बार भी घरेलू बाजार को मजबूती दी है, भले ही दाम आसमान छू रहे हों। व्यापारियों का कहना है कि “कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद घरेलू मांग और त्योहारी खरीदारी ने सोना-चांदी को मजबूती दी है।” साथ ही रुपये में कमजोरी ने भी कीमतों को बढ़ावा दिया है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 2025 में अब तक लगभग 3% कमजोर हुआ है, जिससे आयातित कीमती धातुओं का मूल्य और बढ़ गया।
Gold निवेश बढ़ा, गहनों की मांग घटी
रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुंची कीमतों ने बाजार में मिश्रित स्थिति पैदा कर दी है। निवेशक वर्ग तो उम्मीदों के सहारे ज्यादा खरीदारी कर रहा है, लेकिन गहनों की मांग में लगभग 27% की गिरावट का अनुमान है। कई उपभोक्ता फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं या फिर हल्के और सस्ते डिजाइन वाले आभूषणों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक कीमतों में स्थिरता नहीं आती, पारंपरिक गहना मांग प्रभावित रहेगी।
चांदी की औद्योगिक मांग ने बढ़ाई तेजी
चांदी की कीमतों में तेजी केवल निवेशकों की वजह से नहीं है, बल्कि इसकी औद्योगिक खपत भी लगातार बढ़ रही है। 2025 में वैश्विक स्तर पर चांदी की सप्लाई में 200 मिलियन औंस से ज्यादा की कमी (डिफिसिट) का अनुमान है। यह लगातार आठवां साल है जब आपूर्ति मांग से कम पड़ रही है। आज चांदी का लगभग 59% उपयोग औद्योगिक क्षेत्रों में होता है। विशेषकर सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में इसकी खपत तेजी से बढ़ रही है। 2015 में जहां सौर ऊर्जा क्षेत्र की मांग कुल खपत का 5.6% थी, वहीं 2024 में यह बढ़कर 17% तक पहुंच गई। चूंकि 70% चांदी का उत्पादन अन्य धातुओं के खनन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में होता है, इसलिए सप्लाई में लचीलापन नहीं है। यही कारण है कि कीमतें लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रही हैं।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों का असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट की दर कटौती की थी और वर्ष के अंत तक दो और कटौतियों की संभावना जताई है। निचली ब्याज दरें गैर-उपज वाली संपत्तियों जैसे सोना और चांदी को आकर्षक बनाती हैं। इसके अलावा दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की बढ़ती चाह ने भी सोना-चांदी की चमक बनाए रखी है।
विशेषज्ञों का रॉय क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में चांदी और सोने का रुख काफी हद तक वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी फेड की नीतियों और औद्योगिक मांग पर निर्भर करेगा। यदि औद्योगिक खपत बनी रही और आपूर्ति में कमी जारी रही, तो चांदी नए रिकॉर्ड बना सकती है। सोना भी निवेशकों की सुरक्षित पनाहगाह बना रहेगा, खासकर अगर वैश्विक तनाव गहराते हैं। हालांकि ऊँचे दामों का बोझ सामान्य उपभोक्ताओं और गहना उद्योग पर असर डालता रहेगा।
निष्कर्ष
त्योहारी सीजन ने भारत में सोना-चांदी की चमक को और बढ़ा दिया है। भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव है, लेकिन घरेलू मांग, रुपये की कमजोरी और औद्योगिक खपत के चलते कीमतें नए रिकॉर्ड बना रही हैं। जहाँ निवेशकों के लिए यह सुनहरा मौका साबित हो रहा है, वहीं आम उपभोक्ता बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या त्योहारों की रौनक के बीच सोना-चांदी अपनी तेजी कायम रख पाते हैं या बाजार में सुधार देखने को मिलता है।
